गुरुकुल ५

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Sunday, 19 May 2013

याद


माँ रोज कहानी सुनाती है बेटा आज चंदामामा आयेगा
कोई हमें कहां ले जायेगा?
ले भी गया तो क्या पायेगा?
कुछ ही पलों में वो हमसे
परेशान हैरान हो जायेगा

बिना मुस्कुराये हमें वापस
अकेला राह पर छोड़ जायेगा
उपर उछालोगे तो बालक
आँखें मींचकर गाना ही गायेगा?

सोचते हो पानी गिरेगा तो?
शानू दौड़कर छाता ही लायेगा?
हम जीते हैं रोज इसी धूप में
और बिखर जाती है छाँव कब?

जीवन के आपाधापी में बस
यही रंग पल पल आयेगा
माँ रोज कहानी सुनाती है
बेटा आज चंदामामा आयेगा

पुनः प्रकाशन २१ अक्टूबर २०१० को लिखी रचना का
जिसका प्रकाशन १६ जनवरी शरद पूर्णिमा को।

ललित डॉट कॉम के सर्जक ब्लॉ.ललित शर्मा की एक मात्र टिपण्णी
यायावर ब्लॉ.ललित शर्मा को समर्पित
चित्र गूगल से साभार 

21 comments:

  1. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन ब्लॉग पोस्टों का किंछाव - ब्लॉग बुलेटिन मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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    1. आपने याद को प्रविष्टि के लायक समझा ब्लॉग बुलेटिन परिवार को सादर अभिवादन और आभार

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  2. 'चंदामामा दूर के' को आपकी यादों ने करीब अनुभूत करा दिया.

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    1. सर जी बचपन के कुछ क्षणों को अंकित करने का प्रयास आपने सराहा आभार

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  3. जीवन के आपाधापी में बस
    यही रंग पल पल आयेगा
    माँ रोज कहानी सुनाती है
    बेटा आज चंदामामा आयेगा...बचपन के कुछ यादगार पल..बहुत सुन्दर..

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  4. धन्यवाद बाबु साहब, आपने मुझ अकिंचन को इस लायक समझा. सुभ संझा

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    1. ललित भाई आप ब्लॉग जगत पर ही नहीं हमारे दिल पर भी यायावर बन राज करते हैं
      आपके यायावरी को समर्पित मेरा प्रेम ***********

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  5. पुरानी यादों में ले गयी आपकी पंक्तियाँ , सुन्दर रचना
    चंदा मामा अब दूर नही रहे पर आनंद तभी था जब दूर थे

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  6. बचपन की स्मृतियों को जगाते..कोमल भाव..

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  7. Prashnakul rachna sawal dher se jawab nahi ki chanda mama kab ayega

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    1. आदरणीय आपका प्रेम बरसा हम भी बैठे हैं इंतजार में चंदामामा कब आएगा ? भले ही माँ ने कह दिया बेटा चंदामामा आयेगा

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  8. शरारती बच्चे थे लगता है बचपन में :)
    बधाई !

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    1. आदरणीय सतीश भाई साहब आपका प्रेम बरसा आभार , वास्तव में अम्मा का दुलार ज्यादा मिला तो बचपन मज़े में रहा , नौ मामा में एक ही छोटे भांजा रहे ...

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  9. जीवन के आपाधापी में बस
    यही रंग पल पल आयेगा
    माँ रोज कहानी सुनाती है
    बेटा आज चंदामामा आयेगा ..

    सच तो ये है की रोज़ आता ही है चंदामामा ... आसमां पे और कितनी यादों के साथ कागज़ पे ... शब्द बन के ... शायद यही है जीवन की आपाधापी ...

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  10. yado ki potali ka behatareen khazana, smritio ke aanchal se jhankti prastuti

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  11. जीवन की बहुत सी इच्छाएँ मृग मरीचिका सी ही तो होती हैं.
    उम्मीद बाधे रखती हैं...देर तक दूर तक..हर दिन हर पल...

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    1. सुप्रभात अल्पना वर्मा जी आपकी टिपण्णी और मेल ने सदा मार्गदर्शन दिया आपने सच कहा आपको सादर नमन

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  12. आपने तो बचपन की गलियों की सैर करा दी। खूब आनन्‍द आया।

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  13. पिछले २ सालों की तरह इस साल भी ब्लॉग बुलेटिन पर रश्मि प्रभा जी प्रस्तुत कर रही है अवलोकन २०१३ !!
    कई भागो में छपने वाली इस ख़ास बुलेटिन के अंतर्गत आपको सन २०१३ की कुछ चुनिन्दा पोस्टो को दोबारा पढने का मौका मिलेगा !
    ब्लॉग बुलेटिन के इस खास संस्करण के अंतर्गत आज की बुलेटिन प्रतिभाओं की कमी नहीं 2013 (8) मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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  14. जीवन के आपाधापी में बस
    यही रंग पल पल आयेगा
    माँ रोज कहानी सुनाती है
    बेटा आज चंदामामा आयेगा .... क्‍या बात है, माँ की कहानियों का जादू ताउम्र साथ चलता है

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